पेशाब की नली में पथरी का इलाज

कैसे करे यूरेट्रिक स्टोन का सामना – जानिए पेशाब की नली में पथरी का इलाज

पेशाब की नली में पथरी का अटक जाना एक आपातकालीन समस्या है जिसमे तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है |

जीत नागपाल, एक 35 साल के कंप्यूटर इंजीनियर, को अचानक से निचले पेट के बाएं हिस्से और पेट और जांघ के बीचे के भाग (groin area) में असहनीय दर्द होने लगा | वह दर्द इतना अत्यंत था कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे | उनकी पत्नी ने उनकी इतनी बुरी हालत देख कर उन्हें सीताराम भरतिया के Emergency में ले जाने का फैसला किया |

अस्पताल में पहुँच कर जीत की पत्नी ने वहाँ के on-duty consultants को उनकी हालत के बारे में बताया | जीत तब तक अत्यंत पीड़ा के कारण अपने पेट को ज़ोर से जकड़े हुए थे | उन्हें तुरंत भर्ती कर दिया गया और जांच करने पर डॉक्टरों को आभास हुआ की यह पेशाब की नली में पथरी का केस हो सकता है | उन्होंने बिना किसी देरी के सीताराम भरतिया के सीनियर Urologist, डॉ. राजेश खन्ना, को जाकर सूचना दी |

पेशाब की नली में पथरी का इलाज – क्या होता है यूरेट्रिक स्टोन (ureteric stone)?

जब किडनी में बना हुआ पथरी या स्टोन फिसल कर मूत्रनली या युरेटर (ureter) में फस जाता है तब उसको यूरेट्रिक स्टोन कहते है |  

डॉ. खन्ना का कहना है – “अक्सर लोग किडनी स्टोन होने के लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देते है | लम्बे समय तक शरीर के अंदर रहने के कारण पथरी का माप बढ़ता चला जाता है और कभी कभार फिसल कर मूत्रनली में जाकर फस जाता है | इससे वह पेशाब की धारा को रोकने लगता है जिससे आपातकालीन समस्या खड़ी हो जाती है |”

पेशाब की नली में पथरी का इलाज – क्या है यूरेट्रिक स्टोन के लक्षण ?

जीत अत्यंत पीड़ा के कारण कुछ भी बोलने की हालत में नहीं था इसीलिए उनकी पत्नी ने उनके लक्षणों को विस्तार में समझाया |

“जीत कई दिनों से अपने पेट के दर्द और बार बार पेशाब आने की समस्या से परेशान था | परन्तु हमने इन लक्षणों पर ग़ौर नहीं किया | जैसे – जैसे दिन गुजरने लगे उन्होंने देखा की उनका पेशाब लाल पड़ने लगा जिसको उन्होंने दुबारा नज़रअंदाज़ किया | परन्तु कल जब उनके पेट के निचले-बाएं हिस्से में असहनीय दर्द होने लगा, तब हमने मेडिकल सहायता लेने का फैसला किया |”

अगर आप निम्नलिखित किसी भी लक्षण का सामना कर रहें हैं तो देर न करें | यह किडनी में पथरी का कारण हो सकता है जो इलाज न कराने पर पेशाब की नली में फिसल सकता है –

पेशाब की नली में पथरी का इलाज – कैसे करे यूरेट्रिक स्टोन की पहचान ?

डॉ. खन्ना ने जीत की जांच करी और दर्द से राहत देने के लिए उसको कुछ पीड़ानाशक दवाइयाँ दी | फिर डॉक्टर ने उनको कुछ ब्लड और यूरिन टेस्ट्स कराने को कहाँ | इसके साथ-साथ उन्होंने एक अल्ट्रासाउंड कराने की भी सलाह दी ताकि यह पक्का हो सके की उनके शरीर में पथरी है जो पेशाब की नली में अटक गई है |

जीत का अल्ट्रासाउंड कराने पर पता चला की डॉक्टर का शक सही था | उनके पेशाब की नली में पथरी था जिसका इलाज कराना बेहद्द ज़रूरी हो गया था |

परन्तु जीत और उनकी पत्नी यह जानना चाहते थे कि उनके मूत्रनली में पथरी आई कैसे ?

पेशाब की नली में पथरी बनने का क्या कारण है ?

डॉ. खन्ना समझातें हैं – “पथरी बनने का सबसे आम कारण है कम पानी पीना | कम पानी पीने की वजह से हमारा पेशाब गाढ़ा हो जाता है जिससे उसमे मौजूद मिनरल्स और सॉल्ट्स साथ में इकठ्ठा हो कर जम जाते है और पथरी बनाते है | ये स्टोन्स अक्सर किडनी से उत्पन्न होते है और फिसल कर पेशाब की नली में जाकर फस जाते है | इससे पेट में अत्यंत पीड़ा होने लगती है जिसको यूरेट्रिक कोलिक (ureteric colic) कहाँ जाता है |”

उन लोगों में यूरेट्रिक स्टोन होने की संभावना ज़्यादा है जिनके परिवार में पहले भी किसी को यह हो चुका है |

जब जीत की हालत थोड़ी बेहतर होने लगी और उसको दर्द से भी राहत मिली, तब उनकी पत्नी ने पूरी स्तिथि उनको समझाई जिसके पश्चात् दोनों ने डॉक्टर के साथ पेशाब की नली में पथरी के इलाज के बारे में चर्चा की |

पेशाब की नली में पथरी का इलाज – क्या इसमें सर्जरी की आवश्यकता होती है ?

क्योंकि पथरी जीत के पेशाब की नली में अटक गया था और पेशाब की धारा को रोक रहा था, ऐसे में सर्जरी करा कर उस पथरी को हटाना ज़रूरी था |

डॉ. खन्ना ने कहाँ – “पेशाब की धारा रुकने के कारण यह किड्नीस को भारी नुक्सान पहुँचा सकता है | इसीलिए इस स्तिथि में सर्जरी अनिवार्य है |”

जीत को फिर सर्जरी के लिए ले जाया गया |

पहले तो एक अन्तः शिरा Urogram (Intravenous Urogram) क्रिया की गई ताकि यह जाना जा सके कि पथरी आखिर मूत्रनली के किस हिस्से में फसी है |

“इस क्रिया में अन्तः शिरा द्वारा शरीर में एक contrast agent डाला जाता है जो फिर शरीर के बाहर निकाल दिया जाता है | यह agent डालने के तुरंत बाद ही किड्नीस और मूत्रनली X – Ray पर दिखाई देने लगते है | लगभग 7 से 8 X – Rays अलग-अलग समय पर लिए जाते है ताकि पूरी यूरिनरी तंत्र की छवियाँ ली जा सके | यह करने पर हम पथरी की सटीक जगह जान पाते है | और इससे यह भी पता चल जाता है कि किड्नीस सही तरीके से काम कर रहे है या नहीं |” CT स्कैन कराने से भी पेशाब की नली में पथरी की सटीक जगह पता की जा सकती है |

यह क्रिया करने के पश्चात पता चला कि पथरी जीत के पेशाब की नली के मध्य भाग में अटका हुआ था |

फिर डॉ. खन्ना ने वह पथरी निकालने की सर्जरी को समझाया – “हम एक lithoclast (पथरी को टुकड़े टुकड़े करने का यंत्र) या लेज़र का इस्तेमाल करके Ureteroscopic fragmentation की क्रिया करेंगे | इस क्रिया में एक पतली सी ureteroscope को मूत्रनली में डाला जाएगा | इस यंत्र से हम मूत्रनली को अच्छे से देख पाएँगे और पथरी को ढूंढ पाएँगे | उस पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने के पश्चात एक Ureteric stent का इस्तेमाल करके मूत्रनली को खुला रखा जाएगा ताकि पेशाब और पथरी के टुकड़े आराम से उस नली द्वारा निकल पाए |”

“पथरी को हटाया कैसे जाएगा ?” जीत ने पुछा |

“जब पथरी को हम एकदम छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देंगे तब यह टुकड़े आराम से पेशाब द्वारा शरीर से बाहर निकल जाएँगे | वह stent यह निश्चित करता है कि कोई भी टुकड़ा नली में फसा न रह जाए |”

“Ureteric stent को मूत्रनली में लगभग 4 हफ़्तों तक रखा जाएगा ताकि सर्जरी के आघात से वह सिकुड़ न जाए |”

जीत और उनकी पत्नी ने सर्जरी को पूर्ण रूप से समझने के बाद डॉक्टर के साथ सर्जरी की तारीख़ तय करने लगे |

पेशाब की नली में पथरी का इलाज – सर्जरी के बाद ख्याल

जीत की सर्जरी कामयाब रही और उनको अगले ही दिन घर भेज दिया गया | उनको एक महीने बाद stent निकलवाने के लिए आने को कहा गया |

अगली consultation में जीत ने डॉ. खन्ना से पुछा – “मैं ऐसा क्या करु जिससे मुझे दुबारा किडनी या युरेटर में पथरी का सामना न करना पड़े ?”

पेशाब की नली में पथरी से बचने के उपाय

डॉ. खन्ना ने कहाँ यूरेट्रिक स्टोन से बचने के लिए सबसे ज़रूरी है अपने खानपान में उचित बदलाव लाना |”

“खाने में ज़्यादा नमक लेने से पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है | इसीलिए ज़्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों से दूर रहें | अपने डाइट में थोड़ा सा कैल्शियम शामिल करें और प्रोटीन जैसे चिकन और लाल मांस का सेवन कम कर दें | यह भी ध्यान रखें कि आप oxalate से भरे खाद्य पदार्थों से परहेज़ करे जैसे की – पालक, टमाटर और बैंगन |”

आपको दिन में दो से तीन लीटर पानी और अन्य तरल पदार्थ भी अवश्य पीना चाहिए ताकि आपका पेशाब पतला रहे | इससे पथरियाँ कम बन पाएंगी |

“जब आपको यह जानना हो कि आप उचित मात्रा में पानी पे रहे है या नहीं, तब आप अपने पेशाब के रंग पर ग़ौर करें | पेशाब का सफ़ेद या हल्का पीला होने का मतलब है की आप सही मात्रा में पानी पी रहे है | परन्तु अगर आपका पेशाब गाढ़ा पीला रंग का है तो आपको ज़्यादा पानी पीने की आवश्यकता है |”

जीत ने इन सभी सुझावों को मन से लगा लिया और यह वादा किया की वह एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करेंगे ताकि आने वाले दिनों में उन्हें फिरसे पथरी का सामना न करना पड़े |

“मेरे दर्दनाक अनुभव ने मुझे यह एहसास दिलाया है की हमे कभी भी अपने छोटे से छोटे लक्षणों को भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए” जीत ने कहाँ |”

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