बार बार पेशाब आना

बार बार पेशाब आना – जानिए इसके 6 कारण

बार बार पेशाब आना एक ऐसी चीज़ है जो हम अक्सर नज़रअंदाज़ करते है यह सोच कर कि यह तो एक मामूली बात है | ख़ास तौर पर बुज़ुर्ग लोग यह मानते है की बार बार पेशाब आना बढ़ती उम्र का एक स्वाभाविक परिणाम है | परन्तु यह सही नहीं है |

बार बार पेशाब अधिक मात्रा में पानी या अन्य तरल पदार्थ पीने से आ सकती है परन्तु जब इन सभी कारणों की ग़ैरमौजूदगी में भी यह होता है तब यह किसी गंभीर परेशानी का संकेत हो सकती है |

सीताराम भरतिया के सीनियर urologist, डॉ. राजेश खन्ना, का कहना हैं – “आम तौर पर इंसान दिन में लगभग 4 से 7 बार पेशाब करता है और कुलमिलाकर केवल 2 से 3 लीटर पेशाब शरीर से बाहर जाता है | परन्तु अगर कोई दिन में 6 से अधिक बार पेशाब करने लगे और हर बार सामान्य से ज़्यादा पेशाब निकले तो उस स्तिथि में हम कह सकते हैं कि वह बार बार पेशाब आने की परेशानी (frequent urination) से जूझ रहा है | इस स्तिथि में अक्सर रात के समय भी बार बार पेशाब आता है (nocturia)|”

बार बार पेशाब आना एक ऐसी परेशानी है जिस पर वैसे तो हम ग़ौर नहीं करते हैं परन्तु यह हमारे रोज़मर्रा के जीवन को अस्त-व्यस्त करने की क्षमता रखता है |

“बार बार पेशाब आने के कारण न तो आप सुकून से बाहर जा सकते हैं और न तो रात को चैन की नींद ले पातें हैं | इसीलिए ज़रूरी है कि ऐसे समय में आप शर्मिंदगी से डरने की बजाय किसी अच्छे डॉक्टर से मदद लें |”

अगर आप बार बार पेशाब आने के साथ-साथ निम्नलिखित लक्षणों से भी जूझ रहें हैं तो अवश्य मेडिकल सहायता लें –

  • पेशाब में खून का मिलना (blood in urine)
  • पेशाब करते वक़्त जलन या दर्द महसूस होना
  • पेट के निचले हिस्से और बगल में दर्द होना
  • पूरी तरह से ब्लैडर खाली करने में नाकामयाब होना
  • अचानक से पेशाब करने की तीव्र इच्छा होना
  • पेशाब को बिलकुल न रोक पाना

बार बार पेशाब आना – क्या है इसके कारण ?

बार बार पेशाब आना किसी भी वजह से उप्तन्न हो सकता है | यह या तो ज़्यादा चाय, कॉफ़ी या शराब का सेवन जैसी मामूली वजह से या फिर किसी गंभीर स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से हो सकता है|

आइए बार बार पेशाब आने के हर कारण से रूबरू होते है |

1.  प्रोस्टेट का बढ़ना – Prostate Enlargement (BPH)

पुरुषों में बार बार पेशाब आना प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने का संकेत हो सकता है | BPH 50 से ज़्यादा के उम्र के पुरुषों में होने वाली एक आम परेशानी है |

“पुरुषों में प्रोस्टेट एक ऐसी ग्रंथि है जो ब्लैडर के निचले हिस्से में, मूत्रमार्ग के आसपास स्तिथ है | यह ग्रंथि जीवनभर बढ़ती जाती है परन्तु जब वह अधिक से ज़्यादा बड़ी होने लगती है तब वह मूत्रमार्ग पर दबाव डालती है और पेशाब की धारा को रोक देती है |”

बार बार पेशाब आने के अलावा भी इसके कई और लक्षण है जैसे कि –

  • अचानक से पेशाब करने की तीव्र इच्छा होना
  • रात को 2 से ज़्यादा बार पेशाब करना
  • पेशाब की धारा का पतला हो जाना
  • पेशाब करते करते उसका अचानक से रुक जाना
  • पेशाब निकालने के लिए ज़ोर लगाना

अगर इस बीमारी को जल्दी पहचान लिया जाए तो इसको दवाइयों से ठीक किया जा सकता है | परन्तु समय के साथ-साथ जब प्रोस्टेट बढ़ता चला जाता है तब उसको सर्जरी से छोटा करना पड़ सकता है |

2. किडनी या यूरेट्रिक स्टोन

बार बार पेशाब आने का एक आम कारण है किडनी स्टोन या किडनी में पथरी होना |

डॉ. खन्ना कहतें हैं – “शरीर में किडनी स्टोन बनने का प्रमुख कारण है कम मात्रा में पानी पीना | कम पानी पीने के कारण पेशाब गाढ़ा हो जाता है जिससे यूरिक एसिड (uric acid) और कैल्शियम ऑक्सालेट (calcium oxalate) के क्रिस्टल्स बनने लगते है | ये क्रिस्टल्स आपस में चिपक जाते  है और स्टोन्स बनाते है |”

“अगर समय पर किडनी स्टोन का इलाज न कराया जाए तो ये स्टोन्स बड़े होने लगते हैं | ज़्यादा देर तक शरीर में रहने पर ये मूत्रवाहिनी या युरेटर (ureter) में जाकर फस सकते है (पेशाब की नली में पथरी का इलाज)| यह एक आपातकालीन समस्या होती है क्योंकि फिर ये स्टोन्स पेशाब की धारा को रोक देती है जिससे पेशाब बाहर नहीं निकल पाती |”

जहाँ तक किडनी स्टोन के इलाज का सवाल है, वह उसके माप पर निर्भर करता है | अगर पथरी छोटे माप की है तो आप ज़्यादा पानी पी कर उस स्टोन को आराम से पेशाब द्वारा शरीर से बाहर निकाल सकते हैं | परन्तु अगर वह थोड़े बड़े माप का है तो सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है |

3. मूत्रमार्ग में इन्फेक्शन – Urinary Tract Infection (UTI)

मूत्रमार्ग में इन्फेक्शन महिलाओं में काफी आम है लेकिन यह इन्फेक्शन पुरुषों को भी हो सकता है | इस इन्फेक्शन का एक लक्षण है बार बार पेशाब आना और जलन होना |

पर मूत्रमार्ग में इन्फेक्शन होता कैसे है ?

डॉ. खन्ना समझातें हैं – “जब मूत्रमार्ग के किसी हिस्से में बैक्टीरिया इकठ्ठा हो जाता है तब उस हिस्से में सूजन और जलन होने लगती है | इससे इन्फेक्शन उत्पन्न होने लगता है | जब ये बैक्टीरिया मूत्रनली में सूजन पैदा करते है तब उसको urethritis कहते है | और जब ये ब्लैडर तक पहुँच जाते है तो उस बीमारी को cystisis कहते है |”

“ये इन्फेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया प्रोस्टेट तक भी पहुँच सकते है जिसके बाद वे वहाँ पर सूजन करते है | इसको prostatitis कहते है |”

परन्तु इस बीमारी में घबराने की कोई बात नहीं है | UTI एंटीबायोटिक्स लेने से ठीक हो जाती है | बस आगे चल कर मूत्रमार्ग में इन्फेक्शन को रोकने के लिए ज़रूरी है की आप एक स्वस्थ हाइजीन का पालन करें |

4. डायबिटीज (Diabetes)

बार बार पेशाब आना और हर बार अधिक मात्रा में पेशाब करना डायबिटीज या मधुमेह के मुख्य लक्षण हैं | आइए इस बीमारी के बारे में थोड़ा विस्तार से जानते है |

डॉक्टर सिल्विया एैरीन, सीताराम भरतिया के Consultant Diabetologist और Endocrinologist, कहतीं हैं – “डायबिटीज एक क्रोनिक बीमारी है जो कभी भी किसी को भी हो सकती है | इस बीमारी में पैंक्रियास, जो हमारे शरीर का एक अंग है, उचित मात्रा में इन्सुलिन नहीं बना पाता है जिसके कारण रक्त में शुगर यानि ग्लूकोस की मात्रा बढ़ जाती है | यह शरीर को गंभीर रूप से हानि पहुंचाता है |”

मधुमेह से पीड़ित लोगों को रात को 3 से 4 बार पेशाब आने लगता है और जहाँ तक बात बच्चों की है, तो पेशाब होने के लक्षण न होने की वजह से वे अक्सर बिस्तर गीला कर देते है |

इन्सुलिन नामक हॉर्मोन का हमारे शरीर में क्या भूमिका है ?

“जब हम खाना खाते है, तब हमारा शरीर इस खाने को ग्लूकोस यानि शुगर में तोड़ता है जिसको फिर शरीर की कोशिकाएँ सोख लेतीं हैं | इससे उन्हें ऊर्जा मिलती है | इस क्रिया के सही चालन के लिए ज़रूरी होता है कि पैंक्रियास समय-समय पर इन्सुलिन हॉर्मोन बनाए जो ग्लूकोस को कोशिकाओं के अंदर पहुँचने में मदद करता है ताकि वे ऊर्जा बना सकें | जब पैंक्रियास उचित मात्रा में इन्सुलिन नहीं बना पाता तब रक्त में ग्लूकोस की मात्रा असामान्य रूप से बढ़ जाती है |”

सोचने वाली बात यह है की डायबिटीज के कारण कैसे बार बार पेशाब आ सकता है |

इसके लिए हमे यह समझना होगा कि हमारी किड्नीस काम कैसे करतीं हैं |

हमारे किड्नीस पेशाब बनाते वक़्त रक्त में मौजूद अतिरिक्त शुगर वापस से सोख कर रक्त प्रवाह में डाल देते हैं | क्योंकि डायबिटीज में रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, इससे किड्नीस पर भारी दबाव पड़ता है और वे पूरी तरह से अतिरिक्त शुगर को सोख नहीं पाते हैं | इसके कारण अतिरिक्त शुगर पेशाब द्वारा निकल आता है परन्तु इस दौरान यह शरीर से काफी सारा पानी भी चूस लेता है जिससे अधिक मात्रा में पेशाब निकलने लगता है |

“इस स्तिथि में आपको प्यास भी बहुत ज़्यादा लगने लगती है जिससे पानी का सेवन बढ़ जाता है | यह भी बार बार पेशाब आने में मजबूर कर देता है |”

“आवश्यक है कि डायबिटीज से जूझ रहा हर इंसान नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर की मात्रा को नियंत्रण में रखें क्योंकि लम्बे समय तक अगर इसको नियंत्रित न किया जाए तो यह किडनी फेलियर का कारण बन सकता है |”

5. गर्भावस्था

गर्भ धारण करने के पश्चात एक औरत के शरीर में कई अनोखे बदलाव होते हैं और इन बदलावों के कारण उन्हें बार बार पेशाब आना जैसे लक्षणों का सामना करना पड़ता है | महिलाओं को बार बार पेशाब आना गर्भावस्था के समय एक आम समस्या हो जाती है |

परन्तु इसका क्या कारण है ?

सीताराम भरतिया की अनुभवी Gynecologist -Obstetrician, डॉ. स्वाति सिन्हा, कहतीं हैं – “गर्भावस्था में बार बार पेशाब आना कई कारणों से हो सकता है | सबसे पहले तो यह है कि इस समय शरीर में प्रेगनेंसी हॉर्मोन्स, जैसे कि HcG और प्रोजेस्ट्रोन, बनने लगते है | ये हॉर्मोन्स ज़्यादा पेशाब बनने का कारण होते है |”

दूसरा कारण है – जैसे जैसे बढ़ते बच्चे के लिए जगह बनाने के लिए गर्भ फैलने लगता है, वह ब्लैडर को नीचे ढकेलने लगता है और उस पर दबाव डालने लगता है | ऐसे में ब्लैडर छोटा हो जाता है और ज़्यादा पेशाब जमा नहीं कर पाता है जिसकी वजह से महिलों को जल्दी जल्दी पेशाब करने की आवश्यकता पड़ती है |

“और एक कारण यह भी हो सकता है कि गर्भ धारण करने के पश्चात शरीर में रक्त की मात्रा लगभग 50% से बढ़ जाती है | ज़्यादा रक्त होने की वजह किड्नीस अतिरिक्त फ्लुइड संसाधित करने लगते है जिससे ज़्यादा पेशाब बनता है |”

गर्भावस्था के समय यूरिन इन्फेक्शन (UTI) की संभावना भी बढ़ जाती है | ऐसे में कई बार डॉक्टर यूरिन इन्फेक्शन की जांच कराते है ताकि पता चल सके की बार बार पेशाब आना कहीं उसका लक्षण तो नहीं |

क्या गर्भवस्था में यह परेशानी कम की जा सकती है ?

डॉ. स्वाति कहतीं हैं – “जी हाँ बिलकुल | बस आपको कुछ उपाय अपनाने पड़ते है जैसे कि – चाय-कॉफ़ी जैसे तरल पदार्थ का कम सेवन करना, पेशाब आने पर तुरंत कर देना, उसको रोक के न रखना और हर बार ब्लैडर को पूरी तरह से खली कर देना |”

6. अतिसक्रिय ब्लैडर (Overactive bladder)

एक ब्लैडर को अतिसक्रिय ब्लैडर तब कहा जाता है जब आप इनमे से किसी भी लक्षण का सामना करते है –

  • बार बार पेशाब आना
  • अचानक से पेशाब करने की तीव्र इच्छा होना
  • पेशाब आने पर उसको रोक न पाना और उसका बाहर निकल आना (urine leakage)

डॉ. राजेश खन्ना कहतें हैं – “अतिसक्रिय ब्लैडर एक ऐसी बीमारी है जो सही इलाज न कराने पर एक इंसान के जीवन को अस्त-व्यस्त कर सकता है | यह उसके यौन-संबंध और रात की नींद पर बुरा असर भी डाल सकता है |”

“और यह सोचना बिलकुल सही नहीं है कि ब्लैडर का अतिसक्रिय होना बुढ़ापे का एक आम पड़ाव है | यह एक बीमारी है जिसकी जांच और इलाज कराना अनिवार्य है |”

जब ब्लैडर की मांसपेशियाँ उसके पूरी तरह न भड़ के बावजूद अपने आप अचानक से ही सिकुड़ने लगतीं हैं, तब इंसान को अचानक से पेशाब करने की इच्छा होने लगती है और उसको बार बार पेशाब करना पड़ता है |

“यह कई कारणों से हो सकता है जैसे कि श्रोणि की मांसपेशियों का कमज़ोर हो जाना जिससे ब्लैडर अपनी जगह से नीचे उतरने लगता है (prolapse)|”

सुखद खबर यह है कि आप जीवनशैली में कुछ आसान से बदलाव करके इस बीमारी को मैनेज कर सकते है जैसे कि –

  • उन खाद्य पदार्थ और पीने की चीज़ों से दूर रहना जिससे ज़्यादा पेशाब बनता है जैसे की चाय, कॉफ़ी और शराब
  • ताज़ी फल-सब्ज़ियां और स्वस्थ अनाज (whole grains) का सेवन करना
  • श्रोणि की मांसपेशियों को मज़बूत बनाने के लिए विशेष प्रकार के व्यायाम करना जैसे कि केगेल व्यायाम

इनके अलावा दवाइयों द्वारा भी ब्लैडर की अतिसक्रियता को कम किया जा सकता है जिससे बार बार पेशाब आना, अचानक से पेशाब की इच्छा होना और पेशाब को रोक न पाना जैसे लक्षणों से छुटकारा पाया जा सके |

याद रखें, जब कभी आपको बार बार पेशाब आने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा हो तो शर्मिंदगी के डर से इसको छुपाएं नहीं | सही समय पर डॉक्टर से मदद लेने पर आप बार बार पेशाब आने से छुटकारा पा सकते है और अपने सामान्य जीवन में आराम से वापस जा सकते है |

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