Uric acid in hindi

Uric Acid In Hindi – यूरिक एसिड बढ़ने से हो सकती है ये दो बीमारियाँ

यूरिक एसिड (uric acid in hindi) का बढ़ना एक ऐसी समस्या है जिससे कोई भी कभी भी जूझ सकता है | इनमें से एक थे दीपांकर शर्मा |

दीपांकर शर्मा, 36, को पिछले कुछ दिनों से दोनों पैरों की एड़ियों में एक अजीब सा दर्द होने लगा था (heel pain cause of uric acid in hindi)| यह दर्द तब उठता था जब वह चलने के लिए अपने पैर ज़मीन पर रखते थे |

“जब जब मैं चलने लगता तब तब मेरे एड़ियों में एक चुभन सी होती थी | उन पर थोड़ा सा दबाव पड़ने पर भी दर्द बढ़ जाता था” दीपांकर ने अपनी स्तिथि को समझाते हुए कहाँ | उनको कई दिनों से पेट के निचले हिस्से और पीठ के बीच वाली जगह पर भी दर्द हो रहा था | अल्ट्रासाउंड कराने पर पता चला की उनके किडनी में एक छोटी सी पथरी है |

यह जानने पर दीपांकर की पत्नी ने उन्हें सीताराम भरतिया के सीनियर urologist, डॉ. राजेश खन्ना के पास जांच के लिए जाने को कहाँ |

डॉ. खन्ना ने उनके लक्षणों को सुन कर उन्हें एक ब्लड टेस्ट कराने को कहाँ जिससे उनके शरीर में यूरिक एसिड (uric acid in hindi) की मात्रा पता चल सके | साथ में उन्होंने दीपांकर को सीरम यूरिक एसिड और 24 घंटों वाली Urinary Uric acid टेस्ट कराने को भी कहाँ |

जांच के पश्चात डॉ. खन्ना ने कहाँ – “मेरा शक सही था | आपके खून और पेशाब में अधिक मात्रा में यूरिक एसिड पाया गया है जिससे यह साबित होता है कि आपको गाउट का दौरा पड़ा है | आपको किडनी स्टोन भी इसी कारण से हुआ है |”

दीपांकर को यूरिक एसिड या गाउट के बारे में बिलकुल भी जानकारी नहीं थी इसीलिए डॉक्टर ने उनको समझाया |

क्या है यूरिक एसिड (uric acid in hindi)?

यूरिक एसिड एक ऐसा केमिकल है जो शरीर में तब बनता है जब शरीर प्यूरिन (purine) नामक केमिकल का संसाधन करता है यानि उसको छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ता है | प्यूरिन केमिकल हमारे शरीर में भी बनते है और कुछ खाद्य पदार्थों में भी पाए जाते है |

“इस क्रिया में बना हुआ यूरिक एसिड रक्त में मिल जाता है और किड्नीस तक पहुँच जाता है | हमारे किड्नीस रक्त से इस केमिकल को छान लेते है और पेशाब द्वारा शरीर से बाहर निकाल देते है” डॉ. खन्ना ने कहाँ |

“परन्तु जब शरीर अधिक से ज़्यादा यूरिक एसिड बनाने लगता है या फिर किड्नीस सही मात्रा में इस केमिकल को शरीर से बाहर नहीं निकाल पाते है तब रक्त में इसकी मात्रा बढ़ती जाती है जिससे शरीर में फिर परेशानियाँ पैदा हो सकती है | इस स्तिथि को hyperuricemia कहते है |”

शरीर में ज़्यादा यूरिक एसिड (uric acid in hindi) से क्या हानि हो सकती है ?

डॉ. खन्ना समझतें हैं – “रक्त में ज़्यादा यूरिक एसिड होने के कारण समय के साथ साथ उसके नोकीले क्रिस्टल्स बनने लगते है | ये क्रिस्टल्स या तो शरीर के किसी भी हिस्से के जोड़ पट्टी में या फिर किड्नीस में जा कर जमने लगते है | जोड़ पट्टी में जमने पर ये गाउट जैसी बीमारी का कारण बनते है | किड्नीस में जमने पर ये किडनी स्टोन्स या पथरी बनाने लगते है | दोनों ही हमारे शरीर के लिए हानिकारक है |”

“यह अच्छी बात है की आपने अपने दर्द को नज़रअंदाज़ न करके जांच के लिए आ गए | अगर शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा लम्बे समय के लिए अधिक हो और उसका इलाज न किया जाए तो आगे चल के यह हड्डियों को भारी नुक्सान पहुँचा सकता है | और तो और यह किड्नीस और दिल रोगों के भी कारण बन सकता है |”

किन कारणों से शरीर में यूरिक एसिड (uric acid in hindi) की मात्रा बढ़ सकती है ?

Hyperuricemia कई कारणों से हो सकता है जैसे की –

  • वे खाद्य पदार्थ खाने से जिसमें प्यूरिन की मात्रा अधिक हो जैसे की – चिकन का लीवर, एन्कोवी (नमकीन स्वाद की छोटी मछली, सार्डीन मछली, सूखे बीन्स और मटर, मशरुम
  • मोटापा
  • डायबिटीज या मधुमेह
  • बहुत ज़्यादा शराब पीना
  • कमज़ोर किड्नीस जो सही मात्रा में यूरिक एसिड छान कर शरीर से नहीं निकाल पाते

यूरिक एसिड (uric acid in hindi) के बारे में समझने के पश्चात दीपांकर ने गाउट और किडनी स्टोन्स की बीमारी के बारे में जानना चाहा |

किडनी स्टोन – लक्षण और इलाज

जब पेशाब में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है तब उसके क्रिस्टल्स बनने लगते है जो इकट्ठा होकर किडनी स्टोन्स या पथरी बनाने लगते है |

“अक्सर कम पानी पीने के कारण हमारा पेशाब गाढ़ा हो जाता है जिससे इन क्रिस्टल्स से पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है |”

अगर आपको किडनी स्टोन है तो आपको इन लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है –

  • बार बार पेशाब आना
  • पेशाब करने पर जलन महसूस होना
  • अचानक से पेशाब करने की इच्छा उत्पन्न हो जाना
  • पीठ में या पेट के पास असहनीय दर्द
  • दर्द जो बार बार घटता – बढ़ता रहता है
  • पेशाब में रक्त (Blood in urine)

“ज़रूरी यह है की इनमे से किसी लक्षण का सामना करने पर आप जाँच के लिए आएं क्योंकि ज़्यादा तेर तक अगर पथरी शरीर के अंदर रहा हो तो बढ़ा हो सकता है | यह कभी कभार मूत्रनली में फिसल भी सकता है जिससे ये पेशाब की धारा रोक कर एक आपातकालीन समस्या खड़ी कर सकता है |”

जहाँ तक किडनी स्टोन के इलाज की बात है, यह उसके माप पर निर्भर करता है | अगर स्टोन छोटा है (5-6 mm) तो आराम से पेशाब द्वारा निकाला जा सकता है | बड़े किडनी स्टोन्स अगर दवाइयों से निकाले न जा सके तो ऐसी परिस्तिथि में सर्जरी को उपयोग भी किया जा सकता है |

गाउट की बीमारी – इसके लक्षण और इलाज

डॉ. खन्ना ने कहाँ – “गाउट एक तरह का कष्टदायक आर्थराइटिस है जो शरीर के जोड़ो में यूरिक एसिड क्रिस्टल्स के जमने से होता है | यह एक ऐसी बीमारी है जिसमे अचानक से ही शरीर के किसी भी जोड़ पट्टी में दर्द और सूजन हो जाती है | अक्सर ही यह पैर की सबसे बड़ी ऊँगली को आघात पहुंचाता है और उसमे दर्द पैदा करता है |”

पैर की बड़ी ऊँगली के अलावा यह आम तौर पर घुटनों, एड़ियों, कोहनियों और कलाइयों पर होता है | गाउट होने पर उस अंग के जोड़ को हिलाना मुश्किल और पीड़ाजनक हो जाता है |

यह सुन कर दीपांकर को समझ आया कि क्यों उनकी एड़ियों में चुभने वाला दर्द हो रहा था जो उनका चलना मुश्किल कर रहा था | “इसको कैसे ठीक किया जा सकता है (uric acid ka ilaaj)?” उन्होंने फिर पुछा |

गाउट के लक्षणों को कम करने के लिए सबसे पहला कदम होता है शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा कम करना | यह दवाइयों से किया जा सकता है |

“ऐसी बहुत सी दवाइयाँ मौजूद है जिनसे शरीर के यूरिक एसिड को घोल कर उसको ख़त्म किया जा सकता है | इससे वह जोड़ पट्टी के दर्द को कम कर देता है और आने वाले दिनों में गाउट का दौरा नहीं पड़ने देता | किड्नीस के यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने की क्षमता को भी दवाइयों से बढ़ाया जा सकता है | गाउट के दर्द को कम करने के लिए दवाइयाँ भी मौजूद हैं |”

दीपांकर ने डॉक्टर के दिए हुए सभी दवाइयों के बारे में ध्यान से समझा और उन्हें समय पर लेने का प्रण लिया | इसके साथ-साथ उन्होंने यह भी पुछा – “Uric acid me kya khana chahiye?”

Home remedies for uric acid in hindi

प्राकृतिक रूप से यूरिक एसिड (uric acid in hindi) की मात्रा कम करने के लिए अपने खान-पान पर ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है |

Hyperuricemia को कम करने लिए आप निम्नलिखित उपाय अपना सकते है –

  • शराब का सेवन करना बिलकुल ही कम कर दें
  • प्यूरिन से भरे खाद्य पदार्थों से परहेज़ करे जैसे की – लाल मांस, लीवर, समुद्री खाद्य और चिकन के अन्य अंगों का मांस
  • अपने डाइट में उन खाद्य पदार्थों को अपनाएं जिनमें प्यूरिन कम मात्रा में पाई जाती है जैसे की – निर्मल अनाज, ब्रेड और आटा, दूध, अंडे, हरी सब्ज़ियाँ, फल और  पीनट बटर
  • ज़्यादा पानी पीएं | दिन में कम से कम तीन से चार लीटर पानी पीएं
  • रोज़ व्यायाम करके अपना वज़न घटाने की कोशिश करे और एक स्वस्थ BMI रखें

दीपांकर ने इन सभी सुझावों को मन में बैठा लिया और यह वादा किया कि अपने यूरिक एसिड की मात्रा कम करने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे |

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