अनियमित माहवारी का इलाज

अनियमित माहवारी का इलाज – क्या आप irregular periods से जूझ रहे हैं?

अनियमित माहवारी का इलाज क्या होता है – यह एक सवाल संगीता भल्ला को तबसे परेशान कर रहा था जबसे उन्हें पता चला की उनकी 17-साल की बेटी विद्या अनियमित माहवारी से जूझ  रही है|

इस सबकी शुरुआत तब हुई जब संगीता ने अपने बेटी के मासिक-धर्म का हिसाब रखना शुरू किया|

संगीता कहती हैं – “एक बार जब विद्या ने आकर मुझसे कहा कि उसके माहवारी आने में दो-हफ्ते की देरी हो गई तब मैं चिंतित हो गई और तबसे मैंने उसके मासिक-धर्म का हिसाब रखना शुरू किया | मैंने लगातार चार महीने उसके माहवारी शुरू होने के पहले दिन से लेकर अगली माहवारी के पहले दिन तक गिनती करी | तब मुझे पता चला की विद्या को माहवारी कभी 25 दिनों में और कभी 46 दिनों में होता था|”

अनियमित माहवारी का इलाज और उसके बारे में और जानकारी पाने के लिए संगीता अपनी बेटी को लेकर डॉ. स्वाति सिन्हा के पास आई | डॉ स्वाति सिन्हा सीताराम भरतिया की एक अनुभवी obstetrician – gynecologist हैं |

जांच के दौरान डॉ. स्वाति ने संगीता और विद्या से उसके मासिक-धर्म और माहवारी के बारे में कई सवाल पूछे जैसे कि उसको आखरी बार माहवारी कब हुई थी, उसका मासिक-धर्म पिछले कुछ महीनों में कैसा था और माहवारी के समय उसको कैसी ब्लीडिंग होती है | पूछताछ करने के बाद डॉ. स्वाति को यकीन हो गया कि विद्या को अनियमित माहवारी हो रही है |

विद्या को बिलकुल नहीं पता था की अनियमित माहवारी होती क्या है इसलिए डॉ. स्वाति से मिलते ही उसने अपने सवाल पूछने शुरू कर दिए |

क्या है अनियमित माहवारी का मतलब ?

“माहवारी सम्बन्धी समस्याएं खास तौर पर अनियमित माहवारी एक बहुत ही आम बात है | मध्यम रूप से मासिक-धर्म (menstrual cycle) लगभग 28 दिनों का होता है परन्तु यह हर महिला के लिए एक जैसा नही होता | कभी-कभी यह आगे-पीछे भी हो सकता है” ऐसा कहना था डॉ. स्वाति का |

अगर माहवारी का आगे-पीछे होना एक आम परेशानी है तो हमें कब डॉक्टर के पास आना चाहिए ?” विद्या ने जिज्ञासापूर्वक पुछा |

अनियमित माहवारी के लिए कब करे डॉक्टर से परामर्श ?

अगर आप निन्मलिखित किसी भी परेशानी से जूझ रहे है तो आपको डॉक्टरी परामर्श की आवश्यकता है –

  • मासिक-धर्म का 24 दिनों से छोटा होना या 35 दिनों से ज़्यादा होना
  • माहवारी के समय सामान्य मात्र से ज़्यादा रक्त निकलना या हफ्ते भर से ज़्यादा होना (heavy bleeding or menorrhagia)
  • दो-तीन माह माहवारी ना होना (missed periods)
  • दो माहवारी के बीच में रक्त का जाना (abnormal bleeding during periods)
  • मासिक-धर्म के चक्र का बदल जाना

“अगर आपका मासिक-धर्म अचानक से अनियमित हो जाए या दो-तीन महीने तक माहवारी ना हो तो किसी अच्छे डॉक्टर से जांच ज़रूर कराए | अनियमित माहवारी किसी बड़ी परेशानी का भी संकेत हो सकती है |”

संगीता यह सुनकर थोरी सी निश्चिंत हुई की विद्या के लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने के बजाए उन्होंने डॉक्टर की मदद लेने का सोचा |

संगीता को यह पता था कि अनियमित माहवारी का इलाज जानने से पहले यह ज़रूरी है कि उसके होने का कारण समझा जाए | “अनियमित माहवारी किन वजहों से हो सकती है ?”

क्यों होती है अनियमित माहवारी ?

अनियमित माहवारी कई कारणों से हो सकती है |

“अक्सर अनियमित माहवारी किशोरावस्था की लड़कियों को होती है जिनमें हाल ही में माहवारी की शुरुआत हुई है (menarche) | यह एनओव्यूलेशन की वजह से होता है जिसमें कई बार प्यूबर्टी के शुरूआती सालों में मादा हॉर्मोन असंतुलन हो सकते है | लेकिन एक से दो साल में मस्तिष्क और अण्डाशयों के हॉर्मोन्स का संतुलन बन जाता है और माहवारी नियमित हो जाती है” डॉ. स्वाति ने समझाया |

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क्योंकि विद्या को menarche हुए पांच साल हो गए थे संगीता ने डॉ. स्वाति से दूसरे कारणों के बारे में पुछा|

अनियमित माहवारी होने के कई सामान्य कारण हो सकते है जैसे कि –

  • अचानक से वज़न का बढ़ना या घट जाना
  • आकस्मिक तनाव का बढ़ना
  • IUD (Intra-Uterine Device) का इस्तेमाल करना | इसके इस्तेमाल के प्रारंभिक कुछ महीनों में अनियमित माहवारी हो सकती है
  • मेनोपॉज़ के परिवर्तनकाल के महीनों/साल

अनियमित माहवारी कई बार गंभीर कारणों के वजह से हो सकती है जैसे की –

1) हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidism) की बीमारी होना – थाइरोइड ग्लैंड शरीर में थाइरोइड हॉर्मोन पैदा करता है | पर जब यह ग्लैंड कम मात्रा में थाइरोइड हॉर्मोन पैदा करने लगता है तब उसे हाइपोथायरायडिज्म कहते है और यह अनियमित माहवारी का एक कारण हो सकता है|

2) PCOD (Polycystic Ovarian Disorder) – PCOD या PCOS एक हार्मोनल बीमारी है जिसमे शरीर में सामान्य से ज़्यादा एंड्रोजन हॉर्मोन (male-hormone) बनता है और अण्डाशय नियमित रूप से अंडे नहीं बना पाते है | इसकी वजह से माहवारी काफ़ी अनियमित हो जाती है | अत्यधिक वज़न का बढ़ जाना, मुँहासे होना और चेहरे पर बाल आना इसके कुछ सम्बंधित लक्षण है|

3) गर्भाशय में फाइब्रॉइड्स होना (uterine fibroids) या अण्डाशय में सिस्ट होना – फाइब्रॉइड्स गर्भाशय में होने वाले ट्यूमर होते है जो कैंसरयुक्त नहीं होते है परन्तु माहवारी पर असर डाल सकते है | ओवेरियन सिस्ट एक तरल पदार्थ से भरी हुई थैली है जो महिलाओं के एक या दोनों अण्डाशयों में बन सकता है | ज़्यादातर अण्डाशयों के सिस्ट लक्षणहीन होते है पर यह भी अनियमित माहवारी से संबन्धित हो सकते है |

4) समय से पहले अण्डाशयों का असफल हो जाना (Premature ovarian failure) – जब 40 की उम्र से पहले ही अण्डाशय हॉर्मोन्स बनाना बंद कर देते है क्योंकि उनमें अण्डे लगभग ख़त्म हो जाते है, तब उसको Premature Ovarian Failure कहते है | हॉर्मोन्स के अभाव में माहवारी का ना होना इसका लक्षण है | कदाचित, ओव्यूलेशन हो सकता है और अनियमित माहवारी हो सकती है |

5)अनियन्त्रित डायबिटीज का होना – अनियन्त्रित डायबिटीज का हार्मोनल संतुलन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है जिससे किसी को भी अनियमित माहवारी का सामना करना पर सकता है |

संगीता और विद्या ने ध्यान से इन सभी कारणों को समझा | विद्या की अनियमित माहवारी का कारण ढूंढने के लिए डॉ. स्वाति ने उसको कुछ ब्लड टेस्ट्स और अल्ट्रासाउंड कराने को कहा |

सभी जांचों के पश्चात् पता चला कि विद्या को PCOD है जिसकी वजह से उसको अनियमित माहवारी हो रही थी |

यह सुनकर संगीता चिंतित हो गई और मासिक धर्म ठीक करने के उपाय जानने के लिए उन्होंने डॉ. स्वाति से पुछा – “PCOD के कारण हो रही अनियमित माहवारी का इलाज क्या है?”

अनियमित माहवारी का इलाज  कैसे करे ?

“अनियमित माहवारी का इलाज उसके होने के कारण और उसके प्रकार पर निर्भर करता है | अनओव्यूलेशन के कारण होने वाली अनियमित माहवारी को ओरल गर्भनिरोधक गोलियों से ठीक किया जा सकता है | अगर किसी को अधिक मात्रा में ब्लीडिंग हो रही हो तो उसको non-steroidal anti-inflammatory गोलियों से नियन्त्रण में लाया जा सकता है” ऐसा कहना है डॉ. स्वाति का |

“क्योंकि विद्या की अनियमित माहवारी का कारण PCOD है इसका इलाज भी थोड़ा अलग होगा |”

डॉ. स्वाति ने विद्या को कुछ हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियां लेने को कही जिससे उसका मासिक-धर्म नियन्त्रण में लाया जा सके |

फिर उन्होंने संगीता से कहाँ – “आपको यह ध्यान रखना है कि वह रोज़ थोड़ा व्यायाम करें और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाए | इससे PCOD को मैनेज करने में काफ़ी मदद मिलती है |”

डॉ. स्वाति ने विद्या को प्रोटिन और फाइबर से भरा हुआ पौष्टिक आहार खाने की भी सलाह दी और उसको जंक फ़ूड से परहेज़ करने को कहा |

यह लेख डॉक्टर स्वाति सिन्हा के मार्ग दर्शन के साथ लिखा गया है| डॉक्टर स्वाति OB-GYN के क्षेत्र में अपने स्थिर स्वभाव के लिए जानी जातीं हैं|

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