Spondylosis meaning in hindi

Spondylosis Meaning In Hindi – गर्दन के दर्द से परेशान? यह सर्वाइकल का संकेत हो सकता है

अक्सर गर्दन के दर्द को हम अनदेखा कर देते है परन्तु कभी-कभार यह सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (spondylosis meaning in hindi) जैसी बीमारी का भी संकेत हो सकता है |

जगदीश महेश्वरी, 51 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर, को कई दिनों से गर्दन और कंधे के आसपास की जगह में दर्द और अकड़ता महसूस हो रही थी | पूरे दिन कंप्यूटर के सामने बैठ कर काम करने से यह दर्द और भी बढ़ जाता था |

जगदीश जी कहते हैं – “किसी-किसी दिन मैं सुबह उठता तो मुझे अपने बाजुएँ सुन्न लगने लगते | पहले – पहले मुझे लगा कि यह उम्र के साथ-साथ होने वाली मामूली असुविधा है परन्तु जब मैं एक दिन अचानक से चलते-चलते चक्कर खा गया तब मेरे बेटे ने मुझे सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (spondylosis meaning in hindi) के बारे में बताया और किसी physiotherapist को दिखाने की सलाह दी |”

जगदीश ने सीताराम भरतिया के मुख्य physiotherapist, डॉ. अमन सचदेवा, से जांच कराने का फैसला किया |

डॉ. अमन ने जगदीश के लक्षणों को ध्यान से सुना | फिर उन्होंने उनकी गर्दन की जांच की | उन्होंने जगदीश के मांसपेशियों के ताकत की भी जांच करी यह देखने के लिए कि कहीं उनके रीढ़ के नसों पर दबाव तो नहीं पड़ रहा |

डॉ. अमन ने जगदीश को गर्दन का X – Ray कराने को कहाँ |

Cervical pain ke lakshan

अन्य लक्षण जो सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस से पीड़ित लोगो को हो सकते है –

  • गर्दन में दर्द और अकड़ता जो कन्धों और बाज़ुओं तक फ़ैल जाती है
  • सर में दर्द
  • गर्दन हिलाते समय अकड़ जैसा महसूस होना
  • कंधें, बाजुएँ और हाथ सुन्न पड़ जाना
  • बाज़ुओं और पैरों में कमज़ोरी महसूस होना
  • मूत्रविसर्जन या मलोत्सर्ग करने की इच्छा को न रोक पाना
  • सीधे चलने में मुश्किलें आना

X – Ray रिपोर्ट्स से यह पता चला कि जगदीश जिस दर्द से जूझ रहे थे वह सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस के कारण हो रहा था |

क्या है सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (spondylosis meaning in hindi) ?

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (spondylosis meaning in hindi) एक ऐसी बीमारी है जिसमें गर्दन में मौजूद बिम्ब और जोड़ पट्टियाँ (spinal discs and joints) समय के साथ-साथ कमज़ोर और पतित हो जाती है | इसे गर्दन की आर्थराइटिस (arthritis of the neck) भी कहा जाता है |

ज़्यादातर यह बीमारी मध्यम-वर्षीय और बुज़ुर्ग लोगों में पाई जाती है | डॉ. अमन का कहना है – “सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस 50 की उम्र से ऊपर के लोगों में काफी आम दिक्कत है | परन्तु सही से इलाज न कराने पर यह उम्र के साथ-साथ और गंभीर हो सकती है |”

“इस बीमारी में आखिर होता क्या है ?” जगदीश ने जिज्ञासु होकर पुछा |

डॉ. अमन ने समझाया – “हमारे रीढ़ में 33 हड्डियाँ होती है जिन्हें हम वर्टिब्रे कहते है | ये वर्टिब्रे एक के ऊपर एक होते है और मिल कर एक नलिका बनाते है जो हमारे स्पाइनल कॉर्ड की रक्षा करता है | सर्वाइकल स्पाइन में 7 वर्टिब्रे होते है जिनकी शुरुआत सर के निचले हिस्से से होकर गर्दन तक जाती है | इन वर्टिब्रे के बीच में नरम और लचीले डिस्क्स या बिम्ब होते है जो वर्टिब्रे को सुरक्षित रखते है |”  

“सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में ये बिम्ब दब जाते है जिसके कारण वर्टिब्रे के आसपास की नरम हड्डी (cartilage) घिस जाती है | इसकी वजह से वर्टिब्रे एक दुसरे के साथ रगड़ खातें है जिससे वे पतित हो जाते है और स्पाइन की नसों को जाने की कम जगह मिल पाती है | इससे गर्दन में दर्द होने लगता है |”

जगदीश को उनकी परेशानी का कारण पता चला परन्तु उनके मन में अभी भी यह सवाल था कि यह होता क्यों है ?

What is the cause of spondylosis – सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस किन कारणों से हो सकता है?

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (spondylosis meaning in hindi) के कई कारण हो सकते है जैसे कि –  

  • स्पाइनल बिम्ब या डिस्क्स का सूख जाना (dehydration of discs) – 40 की उम्र तक अक्सर रीढ़ में होने वाले बिम्ब सूखने लगते है जिसके कारण वे सिकुड़ जाते है | इससे वर्टिब्रे एक दूसरे के साथ घिसने लगते है |
  • स्पाइनल डिस्क्स में हर्निया हो जाना (herniated discs) – बढ़ती उम्र के कारण स्पाइनल डिस्क्स में दरार आने लगती हैं जिसकी वजह से ये डिस्क्स अपनी जगह से बाहर खिसकने लगते हैं | यह स्पाइनल कॉर्ड और उधर की नसों पर दबाव डालता है |
  • रीढ़ की हड्डियों में उभाड़ आना (bone spurs) – यह बुज़ुर्ग लोगो में काफी आम परेशानी है | वर्टिब्रे के आसपास की नरम हड्डियों के घिस जाने से असामान्य हड्डियाँ बढ़ने लगती है जिन्हें bone spurs कहतें हैं |

डॉ. अमन कहतें हैं – “कुछ ऐसी चीज़ें हैं जिनके होने से सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है |

यह हैं –

  • यह बुढ़ापे का एक आम हिस्सा है | जैसे – जैसे उम्र बढ़ती जाती है, ज़्यादातर लोगो को इस बीमारी से जूझना पड़ता है |
  • अगर आप ऐसी नौकरी करते हैं जिसमें आपको घंटों कंप्यूटर के सामने बैठना पड़ता है तो आपको इस बीमारी से जूझना पड़ सकता है क्योंकि गलत पोस्चर रखने से गर्दन पर काफी वज़न पड़ता है |
  • पहले कभी गर्दन पर आघात पड़ने से सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस होने की संभावना बड़ जाती है |

यह सुनकर जगदीश को समझ आया की उनको क्यों यह परेशानी हुई | बढ़ती उम्र के साथ-साथ घंटों कंप्यूटर के सामने बैठे रहने की वजह से उनके गर्दन पर काफी तनाव पड़ गया था |

जगदीश ने चिंतिंत होकर पुछा – “अब इस बीमारी से मैं कैसे राहत पा सकता हूँ ?

Cervical ka ilaj in hindi – कैसे पाएँ स्पॉन्डिलोसिस से राहत ?

“सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (spondylosis meaning in hindi) को ठीक करने के लिए हम कई उपाय अपना सकते हैं |”

फिसिकल थेरेपी

सर्वाइकल से राहत पाने के लिए सबसे पहला उपाय जो अपनाते हैं वह है फिसिकल थेरेपी | विशेष प्रकार के व्यायाम करने से गर्दन के दर्द और अकड़ता से राहत पाया जा सकता है | और तो और इससे कमज़ोर मांसपेशियों को मज़बूत बनाया जा सकता है |

“लोग यह व्यायाम घर पर आराम से कर सकते है या फिर किसी physiotherapist के निरीक्षण में भो कर सकते है |”

दवाइयाँ

शुरुआत में मरीज़ को orthopedician दवाइयाँ देतें हैं जिससे उनको दर्द से काफ़ी राहत मिलती है और गर्दन को आराम मिलता है |”

कुछ दवाइयाँ जो इस बीमारी में दी जाती है वे हैं –

  • Non – steroidal Anti – inflammatory औषधि: इन दवाइयों को लेने से गर्दन के सूजन और दर्द में राहत मिलती है |
  • Muscle – relaxants: यह दवाइयाँ तनावपूर्ण मांसपेशियों को आराम देने में मदद करतीं हैं |
  • नरम सर्वाइकल कॉलर – गद्दीदार कॉलर गर्दन को सीधा रखने में और उसके हरकत को सीमित रखने में सहायता करता है | इससे गर्दन की मांसपेशियों को आराम मिलता है | परन्तु यह कॉलर डॉक्टर की सुझाव से ही पहनना चाहिए क्योंकि लम्बे समय तक इसे पहनने से गर्दन की मांसपेशियाँ सुन्न पड़ सकती है |
  • बर्फ़, गर्माहट और मालिश – बर्फ़ और हॉट पैक लगाने से और मालिश करने से दर्द कम होता है |  

“अगर व्यायाम और दवाइयों से स्पॉन्डिलोसिस के लक्षणों से राहत न मिले तो हम सर्जरी के बारे में भी सोच सकते है | परन्तु इस बीमारी में सर्जरी ज़्यादातर सुझाया नहीं जाता है |”

डॉ. अमन ने शुरुआत में जगदीश को कुछ दिन हॉस्पिटल आकर फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी | फिजियोथेरेपी में जगदीश को कुछ व्यायाम बताए गए जो उनको रोज़ कम से कम दो बार करने है |

जगदीश को पहले ही सेशन के बाद करीबन 70% दर्द से राहत मिली | उन्हें यह भी पता चला कि बैठने का सही तरीका क्या है |

“मेरे बहुत से मित्र IT में काम करते है जिसमे उनको घंटों बैठे रहना पड़ता है | इस परिस्तिथि में वे कौनसे उपाय अपना सकते है जिनसे उन्हें इस बीमारी का सामना न करना पड़े ?”

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस (spondylosis meaning in hindi) से बचने के उपाय

भले ही स्पॉन्डिलोसिस (spondylosis meaning in hindi) को रोकने का कोई ठोस उपाय नहीं है परन्तु कुछ आसान से कदम उठाकर हम इस बीमारी से बच सकते है:

  • एक सही पोस्चर रखना हमारे गर्दन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है | आप किस ढंग से बैठे हैं और आपकी गर्दन किस अवस्था में है इसका हमेशा ध्यान रखें | “कोशिश करें की आप हमेशा पीठ और गर्दन सीधा करके बैठें |”
  • ज़्यादा भारी चीज़ें उठाकर अपने गर्दन और कन्धों को तनाव न दें |
  • सोते वक़्त ध्यान रहे कि आप अत्यंत ऊँचे तकिये के ऊपर नहीं सो रहे हैं | एक माध्यम – ऊंचाई वाला तकिया गर्दन के लिए सबसे सही होता है |
  • रोज़ थोड़ा – थोड़ा व्यायाम करें | इससे न सिर्फ आपके गर्दन और कंधे परन्तु आपके पूरे शरीर में स्फूर्ति आएगी |
  • अपना पोस्चर ठीक करने के लिए आप विशेष प्रकार के योग आसन भी कर सकते हैं | इससे मांसपेशियों में मज़बूती भी आती है |
  • लगातार एक ही पोस्चर में कंप्यूटर के सामने न बैठें | काम के बीच में ब्रेक लें और पूरे दिन एक्टिव रहे |

जगदीश ने अपने सभी मित्रों को ये उपाय बताए जिनसे उन्हें सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस को दूर रखने में मदद मिल सकती है |

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