bronchitis in hindi

Bronchitis in Hindi: क्या आपकी ज़िद्दी खाँसी ब्रोंकाइटिस का लक्षण है?

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आपके फेफड़ों में श्वास जिस मार्ग से आती और जाती हैं, उस अंग को श्वासनलि कहते है। यदि आपके श्वासनलि में जलन और सूजन हो जाए तो आपको ब्रोंकाइटिस (Bronchitis in Hindi) हो सकता हैं।

यह एक तरह का उत्तेजन है जिसकी वजह से श्वासनलि ज़्यादा बलगम बनाती है।

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डॉ मयंक उप्पल,  Consultant, General Medicine कहते हैं, “ब्रोंकाइटिस के रोगी ज़्यादातर ज़िद्दी खाँसी और कई बार उसमें निकलने वाली बलगम की शिकायत करते हैं।”

प्रेरणा सह, 25, भी कई दिनों से लगातार होने वाली खाँसी से पीड़ित थी।

वह काफी समय से इसको जुखाम समझ कर नज़र अंदाज़ कर रही थी पर जब खाँसी बहुत बढ़ गई तो उन्होंने डॉ मयंक से परामर्श करने का सोचा। उनके परामर्श के दौरान यह बात हुई।

Bronchitis symptoms in hindi

जैसे प्रेरणा ने अपनी स्थिति के बारे में बताया और कितने दिनों से उसको खाँसी हो रही थी, डॉ मयंक ने स्टेथस्कोप लगा के उनकी जाँच की। जब डॉक्टर ने प्रेरणा के फेफड़ों की ध्वनि को सुना तो उन्हें ब्रोंकाइटिस का अंदेशा हुआ।

डॉ मयंक ने ब्रोंकाइटिस की संभावना के बारे में प्रेरणा को बताया और वह ब्रोंकाइटिस के लक्षणों के बारे में जानने के लिए उत्सुक हो गई।

ब्रोंकाइटिस के लक्षण है :

  • खाँसी
  • बलगम का उत्पादन
  • सर दर्द
  • नाक बहना
  • कुछ केसेस में, सांस लेने में कठिनाई

डॉ मयंक ने जवाब देते हुई कहा, “ब्रोंकाइटिस में अत्यधिक खाँसी, सर दर्द और कई लोगों को सांस लेने में कठिनाई भी हो सकती है।”

“याद रहे, ब्रोंकाइटिस दो प्रकार के होते है – अक्यूट ब्रोंकाइटिस और क्रानिक ब्रोंकाइटिस । इन के लक्षणों में बहुत अंतर नहीं होता पर फ़र्क इनके अवधि और दशा में होता है।”

डॉ मयंक बताते हैं “अक्यूट ब्रोंकाइटिस में सर्दी- जुखाम जैसे लक्षण मेहसूस होते हैं जैसे नाक बहना, खाँसी और हल्का सर दर्द। यह ज़्यादातर एक हफ्ते में सुधरने लगता है”

क्रानिक ब्रोंकाइटिस एक गम्भीर बीमारी है जिसमें श्वासनलि मे निरन्तर जलन या सूजन रहती हैं और अकसर यह सिगरेट के सेवन से होता हैं।

“क्रानिक ब्रोंकाइटिस में समय के साथ खाँसी और संबंधित लक्षण बदतर होते जाते है। कई बार, इसमें खाँसी तीन महीनों से अधिक तक रह सकती है।”

ब्रोंकाइटिस में सांस लेने में कठिनाई हो सकती है जिसकी वजह से बहुत लोग ब्रोंकाइटिस और दमा के रोग को सामान्य समझते है।

प्रेरणा का भी यही मानना था। यह अनिवार्य है की हम इन दोनों के अंतर को समझें।

ब्रोंकाइटिस और दमा में क्या फ़र्क होता हैं?

डॉ मयंक ने प्रेरणा को समझाया, “सबसे अहम बात, ब्रोंकाइटिस में श्वासनलियाँ (bronchial tubes) में सूजन और जलन होती है पर दमा में वायुमार्ग सिकुड़ और सूज जाते है”

“कई बार, ब्रोंकाइटिस बदलते मौसम के वजह से हो सकता है पर दमा मौसम की वजह से नहीं होता। मौसमी परिवर्तन की वजह से दमा बदतर हो सकता हैं पर वह इसके पीछे का कारण नहीं हैं।”

ब्रोंकाइटिस में खाँसी होना एक प्रमुख लक्षण है पर दमा में खाँसी होना ज़रूरी नहीं हैं।

डॉ मयंक के सुझाव पर, प्रेरणा ने ब्रोंकाइटिस टेस्ट कराने का निर्णय लिया।

ब्रोंकाइटिस के रोग का निर्णय

“कई बार, ब्रोंकाइटिस के निर्णय के लिए आपको चेस्ट एक्सरे (chest x-ray), बलगम या फेफड़ों की जाँच भी करवानी पड़ सकती हैं।”

प्रेरणा के टेस्ट रिज़ल्ट में अक्यूट ब्रोंकाइटिस निकला। वह जानना चाहती थी की ब्रोंकाइटिस क्यों होता हैं।

ब्रोंकाइटिस के कारण क्या है?

अक्यूट ब्रोंकाइटिस के पीछे अधिकतर वाइरस का हाथ होता है। यह वायरस ज़्यादातर जुखाम और फ़्लू के लिए भी ज़िम्मेदार होता है। क्रानिक ब्रोंकाइटिस का सबसे आम कारण सिगरेट या धुम्रपान है।

डॉ मयंक कहते है “वायु प्रदूषण, धूल-मिट्टी और जहरीली गैस भी क्रानिक ब्रोंकाइटिस के कारण हो सकते हैं।”

ब्रोंकाइटिस का उपचार

डॉ मयंक ने कहा “अक्यूट ब्रोंकाइटिस में उपचार की  ज़रूरत नहीं पड़ती और यह अधिकतर कुछ हफ्तों में खुद ठीक हो जाता है।”

“आम तौर पर , ब्रोंकाइटिस का कारण वायरस होता है इसलिए एंटीबायोटिक दवाओं का इन पर कोई असर नहीं पड़ता।

“लेकिन अगर आपके डॉक्टर को ब्रोंकाइटिस का कारण बैक्टीरिया लगता है तो वह आपको  एंटीबायोटिक दवा निर्धारण कर सकते है।”

कुछ परिस्थितियों में आपके डॉक्टर, आपको यह दवाई की भी सलाह दे सकते हैं:

    • खाँसी की दीवाई: अगर खाँसी की वजह से आप विश्राम नहीं कर पा रही, तो आपके डॉक्टर आपको खाँसी की दीवाई नियत कर सकते हैं।
    • दूसरी दवाई: अगर आपको एलर्जी, दमा या क्रानिक अब्स्ट्रक्टिव फेफड़ों का रोग (COPD) है, तो आपके डॉक्टर शायद श्वासयंत्र (inhaler) और अन्य दवाई दे सकते हैं। इससे जलन और सूजन में आराम मिल सकता है और  ट्यूब खुल सकते हैं।

डॉ मयंक ने प्रेरणा के ब्रोंकाइटिस की स्तिथि को समझते हुई, उसको ख़ासी के लिए कुछ दवाई दी और स्टीम लेने की सलाह दी।

प्रेरणा जानना चाहती थी की दवाई के अलावा, वह घर पर अपना ध्यान खुद कैसे कर सकती है।

Bronchitis home treatment in Hindi

ब्रोंकाइटिस  के घरेलु इलाज के लिए कुछ चीज़ों का ध्यान रखें :

  • सिगरेट या तम्बाकू का सेवन न करें। अगर आपके जानने वाली सिगरेट पी रहे हो तो उनसे दूर रहे। सिगरेट का धुँआ आपके लिए हानिकारक है।
  • बहार जाने से पहले, मास्क पहने या अपना मुँह और नाक को कपड़े से ढक ले, ख़ास तौर पर जब आप प्रदूषण, पेंट या सफ़ाई करनेवाले उत्पादन के संपर्क में आएें।
  • अपने आस-पास वायु को नम रखने वाला उपकरण रखें।

डॉ मयंक अंत में कहते हैं “ब्रोंकाइटिस को मैनिज करना ज़्यादा मुश्किल नहीं है – बस थोड़ा ध्यान और देख-भाल करने की ज़रुरत होती है। आप सुरक्षात्मक उपायों जैसे मास्क को अपनाए और समय-समय पर अपनी जाँच करवाएं।”

“अगर आपको अपना ब्रोंकाइटिस बदतर होतें हुई दिखें, तो अपने डॉक्टर से सलाह लेने में हिचकीचाय नहीं।”

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