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BP during pregnancy(in hindi): लक्षण, प्रकार और इलाज

दिल्ली की रहने वाली सलोनी शर्मा अपने 34th सप्ताह में डॉ स्वाति के पास आई जो सीताराम भरतीया हॉस्पिटल में सीनियर Obs- gynecologist है| 

सलोनी जब अपने रूटीन चेकअप के लिए आई तो उन्होंने डॉ स्वाति को बताया “मेरे हाथ- पाँव में बहुत सूजन है|” 

जिसे सुनते ही डॉ स्वाति ने उन्हें कुछ टेस्ट और अल्ट्रसाउंड कराने की सलाह दी| सलोनी ने यह टेस्ट और अल्ट्रसाउंड कराने का कारण पूछा तो डॉ स्वाति बोली

“लगभग 10-15% महिलाओं को गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप (high blood pressure in pregnancy in hindi) होता है। कई बार, यह माँ और बच्चे दोनों के लिए गंभीर खतरे का कारण बन सकता है| हालाँकि प्रेगनेंसी के समय पर पाँव में सूजन होना आम होता है, कई बार ये हाई ब्लड प्रेशर का संकेत भी हो सकता है|” (pregnancy me high BP ke lakshan

“प्रेगनेंसी में हाई बीपी के अन्य लक्षण क्या हैं?” (pregnancy me high bp ke lakshan)

हाथ- पाँव में सूजन के अलावा यह निम्नलिखित लक्षण प्रेगनेंसी के दौरान बीपी के संकेतक है: 

  • आँखों के सामने अँधेरा छा जाना या धुंधला दिखाई देना 
  • चक्कर आना
  • मूत्र उत्पादन में कमी
  • बिना कारण वज़न बढ़ना 
  • सिर दर्द
  • पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द

इनमे से कोई भी लक्षण का अनुभव होते ही आपको अपने डॉ से सलाह लेनी चाहिए| 

“इसका अनुमान लगाना मुश्किल है की किन महिलाओं को उच्च बीपी की तकलीफ होगी| इसका पता माँ को रेगुलर परामर्श और अल्ट्रसाउंड द्वारा ही किया जा सकता है|”

यह सुनकर सलोनी डर गई| और पूछे कुछ सवाल| 

“प्रेगनेंसी में ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए?” (pregnancy me BP kitna hona chahiye in hindi)

“प्रेगनेंसी के दौरान बीपी (BP during pregnancy in hindi)  में उतार-चढ़ाव आम बात है| इस बीच अगर आपका बीपी 140/90 से ऊपर जाता है तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए” ऐसा समझाया डॉ स्वाति ने| 

“प्रेगनेंसी में हाई बीपी के कितने प्रकार होते है?” (pregnancy me high bp ke prakaar)

गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप (high BP)  के 3 प्रकार होते है। 

 

  • गेस्टेशनल हाइपरटेंशन या प्रेगनेंसी इनडयूसड़ हाइपरटेंशन (Gestational Hypertension or Pregnancy induced hypertension)

 

इसके बारे में डॉ स्वाति समझाते हुए कहती है “उच्च रक्तचाप के कारण शरीर में परिवर्तन होता है, जिससे माँ और बच्चे दोनों को रक्त की मात्रा और रक्त प्रवाह में प्रभाव पड़ता है| गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी से शिशु कमज़ोर हो सकता है|” 

यह सुनकर सलोनी पूछती है, “इसे किस तरह संभाला जा सकता है?” 

“गर्भावस्था से प्रेरित उच्च रक्तचाप (Pregnancy induced hypertension) वाली ज़्यादातार माताओं में उच्च रक्तचाप (High blood pressure) होता है और बच्चे की देखभाल के लिए केवल नियमित जांच, रक्त और मूत्र परीक्षण और विभिन्न अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थितियों में, आमतौर पर प्रसव के बाद रक्तचाप सामान्य हो जाता है” कहती है डॉ स्वाति | 

 

  • प्री- एक्लेम्पसिया (Pre-eclampsia) 

 

“इस स्थिति में महिला के मूत्र में प्रोटीन की मात्रा ज़्यादा पाई जाती है और महिला को हाथ पाँव में सूजन महसूस होती है| ज़रूरी ये है की आप अपने बीपी का समय पर परीक्षण कराते रहे|” 

अगर आपको लक्षण जैसे सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना, मूत्र उत्पादन में कमी या के ऊपरी हिस्से में दर्द का अनुभव हो तो आपको तुरंत बीपी को नियंत्रित करने के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

सलोनी थोड़ी गभराई हुई पूछती है “इसका परीक्षण क्यों ज़रूरी है और क्या इसकी कोई दवाई उपलब्ध नहीं है?”

“प्रेग्नेंसी के दौरान उच्च बीपी का हल केवल दवा से नहीं हो सकता,” डॉ स्वाति बताती हैं।

 

  • क्रोनिक उच्च रक्तचाप और गर्भावस्था (Chronic Hypertension and Pregnancy)

Chronic blood pressure  आपकी गर्भवस्था पर असर कर सकता है इसीलिए ज़रूरी है की गर्भावस्था के शुरू होने से पहले ही आप doctor से मिले| ऐसा सम्भव है कि आपकी पुरानी दवाएँ बदली जाए पर या उन्हें कुछ ऐसी चीज़ों से रोकना पड़े जो गर्भावस्था के लिए अनुकूल हो|

प्रेगनेंसी में बीपी कंट्रोल कैसे करें? (pregnancy me BP control kaise kare) 

“प्रेगनेंसी के प्रारंभिक चरण में बीपी का पता लगाना और उचित प्रबंधन एक स्वस्थ माँ और भ्रूण सुनिश्चित करने की दिशा में पहला कदम है” कहती है डॉ स्वाति| 

“हाई बीपी का कारण हमेशा पहचाना नहीं जा सकता, इसलिए कुछ सावधानियां और जीवनशैली में बदलाव से मां और बच्चे दोनों को फायदा होता है।”

“इन सबके अलावा माँ के लिए बहुत ज़रुरी है की वह अपनी जीवनशैली पर ध्यान दे जैसे: आराम करें, वज़न नियत्रित रखें, खान- पान पर विशेष ध्यान दें और तनाव से दूरी बनाये रखें|” 

सलोनी ने सारे जवाब ध्यानपूर्वक सुने| अब उन्हें इंतज़ार था अपनी टेस्ट के परिणाम का| 

जब परिणाम आया तो सलोनी डॉ स्वाति से दुबारा परामर्श लेने आई और डॉ ने उन्हें कहा, “घबराने की कोई बात नहीं है| यह प्रेगनेंसी इनडयूसड़ हाइपरटेंशन का मामला है| इस पर नियंत्रण रखने के लिए आपको केवल नियमित जांच की ज़रूरत होगी|” 

सलोनी को doctor की बात सुनकर तस्सली हुई| उन्होंने 36वें सप्ताह में एक शिशु को नार्मल डिलीवरी द्बारा जन्म दिया और प्रसव के कुछ ही घंटो के अंदर उनके बीपी की समस्या सुलझ गई|

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