pcod in hindi

PCOD in Hindi – कैसे रखें PCOD में अपना ख्याल

PCOD (in hindi) या पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिसॉर्डर एक हॉर्मोनल डिसऑर्डर है जो किसी भी महिला को हो सकती है | और इसका सबसे प्रत्यक्ष लक्षण है अनियमित माहवारी होना या माहवारी बिलकुल ना होना |

भारत में लगभग 5 में से 1 महिला PCOD से जूझ रही है | परन्तु आज भी कई लोगों को इस डिसऑर्डर  के बारे में पूरी तरह से नहीं पता है जिससे इसको पहचानने में भी दिक्कतें आ जाती है|

लेकिन भले ही PCOD के कई कारण है इसका इलाज भी मुमकिन है | आइए इसके बारे में और जानते है |

PCOD problem in females – क्या है PCOD (in hindi)?

PCOD एक एंडोक्रिनोलोजिकल और गयनेकोलॉजिकल बीमारी है जिसमें अण्डाशय नियमित रूप से अंडे नहीं बना पाते है ओव्यूलेशन सही से नहीं हो पाती है |

“PCOD (in hindi) में अण्डाशय बड़े हो जाते है और उनमें छोटे-छोटे बहुत सारे तरल पदार्थ से भरे हुए थैलियाँ (follicles) बन जाती है जो कई बार अंडे समय पर नहीं बना पाते | इसलिए इन अण्डाशयों को हम पॉलिसिस्टिक कहते है” ऐसा कहना है डॉ. प्रीति अ.धमीजा का जो सीताराम भरतिया की अनुभवी Obstetrician – Gynecologist है |

“इस डिसऑर्डर में महिला के शरीर में एंड्रोजेंस यानि नर हॉर्मोन्स की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे हॉर्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है | हॉर्मोन्स के असंतुलित होने पर ओव्यूलेशन पर बुरा असर पड़ता है और नियमित रूप से अंडे नहीं बन पाते है |”

परन्तु गौर करने वाली बात यह है कि PCOD के लक्षण हर महिला के लिए अलग हो सकते है जिसकी वजह से इस बीमारी को सही से पहचानना एक कठिन काम हो जाता है |

तो फिर PCOD होने पे महिलाओं को कौनसे लक्षणों का सामना करना पर सकता है ?

क्या है PCOD (in hindi) के लक्षण ?

यह ज़रूरी नहीं है कि अनियमित माहवारी के होने से, अचानक वज़न के बढ़ने से या परिवार में अनियमित माहवारी का इतिहास होने से आपको PCOD है |

हर महिला में PCOD के लक्षणों का अलग मिश्रण पाया जाता है |

अगर आपको निम्नलिखित तीन में से कम-से-कम दो लक्षणों का भी सामना करना पड़ रहा है तो आपको PCOD हो सकता है –

  • अनियमित माहवारी – डॉ. प्रीति का कहना है – “अनियमित माहवारी अक्सर PCOD होने का सबसे पहला संकेत है | कभी-कभी माहवारी न होना या देर से होना और माहवारी के वक़्त ज़्यादा रक्त निकलना इसके कुछ लक्षण है |”
  • अतिरोमता (Hirsutism)- शरीर और चेहरे पर अधिक से ज़्यादा बालों के उगने को अतिरोमता कहते है | डॉ. प्रीति कहती है – “PCOD के कारण शरीर में काफ़ी बदलाव आ सकते है जैसे की चेहरे और शरीर के कई हिस्सों पर ज़्यादा बाल उगना | यह शरीर में ज़्यादा नर हॉर्मोन्स बनने की वजह से होता है |” “चेहरे पर खुरदरे और घने बालों का उगना इस बीमारी का एक आम लक्षण है | ज़्यादातर बाल होंठ के ऊपरी हिस्से, ठुड्डी, छाती, नाभि, पीठ और जंघा के अंद्रूणी हिस्से पर उगते है |” शरीर में एण्ड्रोजन के बढ़ने से सर के बाल पतले भी हो सकते है जिससे बालों का झड़ना बढ़ सकता है |
  • भरी मात्रा में मुँहासे – PCOD के कारण आपकी स्किन तेलपूर्ण हो जाती है जिससे अधिक मात्रा में मुँहासे बनने लगते है | मुहांसे अक्सर चेहरे, पीठ और छाती पर आते है |
  • गर्भधारण करने में दिक्कत – PCOD से जूझ रही महिलाओं को कभी कभार गर्भधारण करने में दिक्कत आ सकती है | “अधिक मात्रा में एण्ड्रोजन होने के कारण नियमित रूप से ओव्यूलेशन नहीं हो पाता | अण्डों के न निकलने की वजह से गर्भधारण करने में परेशानी पैदा हो जाती है ” ऐसा कहना है डॉ. प्रीति का |PCOD से पीड़ित महिलाओं को कभी कभार गर्भधारण करने के लिए मेडिकल सहायता की ज़रुरत पड़ सकती है |
  • मोटापा – मोटापा या ओबेसिटी PCOD का एक कारण भी हो सकता है और एक परिणाम भी | “PCOD से जूझ रही महिलाओं का वज़न अक्सर जल्दी बढ़ जाता है और वज़न घटाने में भी मुश्किलें आती है | वज़न के बढ़ने से PCOD के लक्षणों पर भी बुरा असर पड़ता है | इसलिए इस बीमारी में अपने वज़न पर ध्यान रखना अतिआवश्यक हो जाता है |”

“कई लोगों का मानना है की केवल मोटापे से जूझ रही महिलाओं को PCOD की बीमारी हो सकती है जो बिलकुल सच नहीं है | कम वज़न वाली औरतों को भी यह बीमारी हो सकती है |”

सोचने वाली बात यह है कि ऐसी बीमारी आखिर कुछ महिलाओं को होती क्यों है ?

क्यों होता है PCOD (in hindi)?

PCOD होने का समुचित कारण अपरिचित है परन्तु कुछ फैक्टर्स इसके होने पर एहम असर डालती है –

आनुवांशिकता (Genetics)

अनुसन्धान से पता चला है कि PCOD कभी कभार आनुवांशिक (genetic) होता है | डॉ. प्रीति का मानना है – “अक्सर यह देखा गया है कि जिनके परिवार में कुछ महिलाओं को PCOD हो चुका है उनको यह बीमारी होने के ज़्यादा चान्सेस होते है |”

अधिक मात्रा में इन्सुलिन

कई बार शरीर में अधिक इन्सुलिन होना PCOD का प्रमुख कारण होता है |

डॉ. सिल्विया आइरीन, सीताराम भरतिया की एंडोक्रिनोलोजिस्ट, समझाते हुए कहती है – “इन्सुलिन शरीर में पैदा होने वाला एक हॉर्मोन है जो रक्त में होने वाले शुगर को नियंत्रण में रखता है और ग्लूकोज़ को रक्त से कोशिकाओं में ले जाता है जहा वो ऊर्जा पैदा करता है |

परन्तु कई बार शरीर की कोशिकाएँ इन्सुलिन से प्रतिरोधक (insulin resistance) होते है जिससे शरीर उसका मुआवज़ा करने के लिए ज़्यादा मात्रा में इन्सुलिन बनाने लगता है | ज़्यादा इन्सुलिन के होने से अण्डाशयों में सिस्ट्स बनने लगते है जिससे वे अधिक एंड्रोजेंस बनाने लगते है | इससे ओव्यूलेशन पर असर पड़ता है |

मोटापा (Obesity)

शरीर में ज़्यादा मोटापा होने के कारण भी इन्सुलिन ज़्यादा बनने लगता है जिससे PCOD होने की सम्भावना बढ़ जाती है | शारीरिक निष्क्रियता होने से भी इन्सुलिन रेसिस्टेन्स बढ़ जाती है |

लेकिन क्या इस बीमारी का कोई ठोस इलाज है ?

PCOD का इलाज (in hindi) – कैसे करे PCOD का सामना ?

“PCOD का कोई ठोस इलाज नहीं है परन्तु समय पर इसकी की जांच करने से और इसको मैनेज करने के तरीके अपनाने से काफ़ी मदद मिल जाती है और आने वाले दिनों में भी परेशानियाँ होने की सम्भावना कम हो जाती है” ऐसा कहना है डॉ. सिल्विया |

“जीवनशैली में कुछ आसान से बदलाव लाकर PCOD के लक्षणों को कम किया जा सकता है | उनमें से सबसे महत्वपूर्ण है स्वस्थ खानपान और व्यायाम |”

“यह ज़रूरी है की आप याद रखे की वज़न घटना एक लम्बी क्रिया है जिसमे समय लगता है | इसीलिए अपने खानपान पर ध्यान रखें और अपने आप से ज़्यादा कठोर ना होए | ऐसे मामलों में धीरज से काम लें |”

एक आदर्श वज़न इन्सुलिन रेसिस्टेन्स कम करने में मदद करता है और हॉर्मोन्स के संतुलन में भी सहायता करता है | “बेहतर है कि आप वज़न घटाने के लिए एक प्रशिक्षित nutritionist की सहायता लें |”

आप खुदसे भी अपना आदर्श BMI का अंदाज़ा लगा सकते है जिससे आपको पता चलेगा की आपके लम्बाई के अनुसार आपके लिए कौनसा वज़न उचित रहेगा |

BMI = आपका वज़न (kg) / आपकी लम्बाई का स्क्वैर (m2)

PCOD (in hindi) का आहार – किन चीज़ों से करे परहेज़?

PCOD के लक्षणों से राहत पाने के लिए सबसे एहम है अपने खान-पान का ध्यान रखना | इस बीमारी में एक कम कार्बोहाइड्रेट्स और कम फैट वाले डाइट पर ज़ोर होना चाहिए |

“मैं अपने मरीज़ों को प्रोटीन्स और फाइबर से भरा हुआ आहार खाने के लिए प्रोत्साहित करती हूँ |”

PCOD होने पे आप अपने डाइट में यह सारे बदलाव कर सकते है –

  • कार्बोहाइड्रेट्स से भरे हुए खाने से परहेज़ करें जैसे की चीनी, मिठाई, नमकीन और ब्रेड
  • अपने आहार में अच्छे प्रोटीन्स जैसे पनीर,अण्डे, मांस या मछली का सेवन करें
  • होल ग्रेन्स जैसे की भूरे चावल, रागी या ओट्स खाएँ
  • बहुत सारा फाइबर जैसे की फल, स्प्राउट्स और सलाड का सेवन करें
  • ज़्यादा मात्रा में ग्लाइसेमिक (glycemic) होने वाले खाद्य पदार्थों से दूर रहे जैसे की आलू, सफ़ेद ब्रेड और छोटे दानों वाले चावल

डॉ. सिल्विया कहती है – “जब कभी आपको कुछ छोटा-मोटा खाने का मन करे तो 4 – 5 बादाम, चने या मखाने खा लें परन्तु प्रोसेस्ड (processed) खाने से परहेज़ करें |”

PCOD (in hindi) tips – व्यायाम के लिए क्या करें ?

डॉ. सिल्विया का मानना है – “रोज़ – रोज़ थोड़ा-थोड़ा व्यायाम करना PCOD से जूझ रही महिलाओं के लिए अनिवार्य है | आप रोज़ 30 से 45 मिनट टहलने से शुरुआत कर सकते है |” धीरे – धीरे आप अलग तरह के व्यायाम शुरू कर सकते है जैसे की एरोबिक्स, स्विमिंग या साइकिलिंग |

व्यायाम ना सिर्फ वज़न घटाने में परन्तु तनाव कम करने में काफ़ी मदद करता है | और तो और रोज़ व्यायाम करने से हॉर्मोन्स का संतुलन भी बना रहता है |

PCOD (in hindi) के साथ ज़िन्दगी – रितिका की कहानी

रितिका केवल 17 साल की थी जब उसको पता चला की उसको PCOD है |

“जब एक बार मुझे लगातार चार महीनों तक माहवारी नहीं हुई तब मैंने अपने माहवारी के पैटर्न पर ध्यान देना शुरू करा | मैंने देखा की मुझे बहुत अनियमित माहवारी होती थी | ऊपर से मेरे चेहरे पर भी ज़्यादा मात्रा में मुँहासे आने लगे थे | मैंने बिना देरी किए डॉ. प्रीति को दिखाया जिसके बाद मैंने जाना की मेरी अनियमित माहवारी का कारण PCOD है |”

डॉ. प्रीति की सहायता से और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से रितिका के लक्षण काफ़ी कम हो गए और उसमे और कॉन्फिडेंस आ गया |

“पिछले कुछ महीनों की मेहनत और एक स्वस्थ डाइट अपनाने से मेरे लक्षणों में काफ़ी सुधार आया है | इस पूरे सफर में मुझे यह समझ आया है कि PCOD होते हुए भी मैं एक खुशहाल जीवन जी सकती हूँ” ऐसा कहना था रितिका का|

यह लेख इन्फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट और obstetrician-gynecologist डॉक्टर प्रीति अ. धमीजा के सहयोग से लिखा गया है| डॉक्टर प्रीति अपने शांत स्वभाव और विशेषज्ञता की वजह से जानी जाती हैं|

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